મારું મંતવ્ય

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Ahmedabad , Gujarat, India
''well wisher women.club'' નામે મારી એક બહેનોની સંસ્થા ચાલે છે.જેમાં બે સહિયારી નવલકથા ''મનસ્વી'' અને ''મીણ પાષાણ'' પબ્લીશ થઇ છે. શબ્દની આરાધના કરવી એ મારો જીવનમંત્ર છે. આવનારી પેઢીને વાંચતા આવડશે પણ લખતા નહિ આવડે!

Saturday, May 27, 2017

अव्यान 2.5 साल


अव्यान 
आज तुं ढाई सालका हुआ
वो सारी बातें मुझे याद है।
पहेली बार आंखे  खुलना,
पहेली बार तेरा रोना,
पहेली बार गर्भ नाल काटना,
यानी गर्भसे नाता तोडना,
पृथ्वीसे नाता जोडना,
पहेली बार माँ के आँचलका स्पर्श,
तन और मनको पुष्ट होनेका मर्म,
पहेली बार नन्हे नन्हे हाथ-पाँव हीलाना,
कृष्णलीलासे कहां कम  ?
पहेली बार नानीका मधुप्राशन पिलाना !
यानि बन गया राजदुलारा;
पहेली बार तेरा प्यारा सा मुस्कुराना,
यानि धरती पे स्वर्ग उतरना!
पहेली बार खडा होना, बैठना
और घुंटनोके बल चलना…
माता-पिताका बचपन वापस आना!
छोटे छोटे पाँवसे पहेला कदम रखना,
यानि जिंदगी की उड़ान, पंख फैला ना!
तेरा अवतरण…
दादा दादीकी खुशियाँ,
नाना नानी की फुहार,
चाचा मामु की दुनिया,
खुशियोंका पैगाम ।।

जहाँ जहाँ कदम रखो तुम
वहाँ वहाँ ख़ुशियाँ बिखरे
भरना उँची उड़ान जिंदगी की
पर पाँव जमींपे रखना ।।

नीता नानी



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